Thursday, May 14, 2020

IIM Journey from being a TB patient to A Fitter Me

Finally completed Executive program in IT Management and Analytics..A big thanks to my professor,my mom.

Long Post But I will request to give a read and share if you can...It has a journey...

Passing An Executive Program from IIM,what's great in it,or may be it is as it actually involves not just your hard work or just the immense knowledge you gain.It's actually a combination of you,your families energy and sometimes trust from your organization which is very important when you are working while studying.

So,I just thought to write some of the key learnings from my journey which I can say have 3 phase

1.A young woman who was successful after a lot of hardwork and was actually dreaming to start a new life as every girl does by searching prospective partner for her and one day on 21st January,2018 I was detected with Lymphnode Tuberculosis and Left Eye Uveitis where I almost faced worst pain when I had very bad blurring vision and was unable to see my best friend passing by me to almost loosing life when water almost entered lungs during biopsy to being a published poet.Belive me those 9 months of AKT treatment was worst.

2.On the same day next year I.e. 21st January 2019,where I actually started my IIM journey which I may be never imagined in life where I actually learnt about NEW IT and made some best friends ..

3.New Me Who was always plump finally was able to shed those extra kilos with some hard work..

This 2.5 years taught me to deal with worst and still enjoy life and really I mean it's ok to cry sometimes as none of us are champs...

I just want to share few key learnings from life from past 2.5 years...

1.Life can give you any suprise at any time,so prepare for worst sometimes..

2.If you know you are not doing good in life,try to question yourself,you will get one thing about you,which will make you prove you have a talent,just nournish it for that time and persue it and you will feel good and your feeling of bad gets less,for me it helped as I published my first book that time and believe me I got some inner strength to fight back.

3.Its only you who can actually fight back and if you really feel you are going into sadness or anything,it's ok to seek medical advice.

4.No one in the World is as supportive as your family especially your parents,belive me,My Mom is superwoman,she herself had to seizure attack in 2018 but stood with me like a strong pillar...

5 Believe in One supreme power,sometimes it has some plans..

6.Sometimes you are about to achieve something but it ends somehow but it's ok,may be something best is there for you.

7.Its always good to have control on your cravings especially Pizza with softdrinks can land you in worst situation which I actually faced...

8.Always be ready to take risks and start something new and challenge yourself..

9.#hardworkpaysoff  hardwork always rewards you..

10.Sometimes it's ok to have a heartbreak may be not always all heartbreaks be from romantic angle,sometimes a trust can be a heartbreak too but still be strong...

11.Most important Health is wealth and atleast give some time for yourself...

12.Last but not least,it's never too late,sometimes some success comes

13.Trust Your Doctors as they can give you good medical advise.I want to thank Dr. Mayur R. Moreker  always helped and guided me while treating my Uveitis,Dr.Prashnat Chajjed who I felt has some awesome energy and Doctors at Madhavbaug  who actually are guiding me well in my weight loss journey.

14.Few friends are precious,treasure them,they really don't expect much...

15.Finally enjoy life,belive in yourself and smile as I always say it costs nothing...

Sunday, February 18, 2018

Short story 2-Dard ka rishta


2.दर्द का रिश्ता
पुरानी कहानी है जहां  छोटी सी लड़की से बहुत कुछ सीखा उसने सीखा यह भी एक हॉस्पिटल की घटना है एक प्रेम कहानी है थोड़ी अलग सी अजीब सी पी है

इस कहानी के दो पात्र हैं एक है नीता और दूसरा है दिनेश डॉ दिनेश , नीता अपने मास्टर की फर्स्ट ईयर की पढ़ाई करती थी डॉक्टर दिनेश सर्जरी की.

नीता 1 दिन अपने पापा के कैंसर के इलाज के लिए मुंबई के बड़े हॉस्पिटल गई हुई थी डॉ दिनेश वहां पर अपनी सर्जरी सर्जरी की पढ़ाई करते थे.

नीता आज भी उस पहले दिन की मुलाकात नहीं भूल सकती डॉ नवीन जो डॉक्टर दिनेश के सीनियर हुआ करते थे ने कहा नीता के पापा को  हॉस्पिटल में एडमिट करना होगा और उन्होंने डॉक्टर दिनेश से मिलने बोला

हॉस्पिटल में एडमिट होने के बाद डॉ दिनेश उसके पापा का चेकअप करने आए और उनकी केस हिस्ट्री पूछी नीता के पापा बोले जितना उनको पता था नीता इन मामलों में जरा ज़्यादा ही जानती थी उसने बड़ी ही सरलता और सटीकता से उसके पापा के केस हिस्ट्री को बताया डॉक्टर दिनेश सिर्फ सुनते गए

नीता की भी तबीयत ठीक नहीं हुआ करती थी वह सारा दिन अपनी पढ़ाई  हॉस्पिटल में बैठकर करती थी उसे देखती थी डॉक्टर दिनेश उसे छुप छुप कर देखा करते थे सोच समझ कर भी समझ समझना नहीं चाहती थी यह बात उसकी मम्मी पापा ने देखी पर कुछ बोलते नहीं थे डॉक्टर दिनेश कि एक बात से बहुत ज्यादा प्रभावित हुई जो था किसी भी केस हिस्ट्री को पढ़ना . डॉक्टर दिनेश कितना मन लगाकर किसी भी पेशेंट की फाइल को पढ़ते  दिनेश के साथ उनके और भी सहयोगी थे जो वहां पर पढ़ाई करते थे अरुण के साथ तो मजाक मस्ती चलती रहती थी

वह दिन है जब नीता के पापा का पहला ऑपरेशन था कैंसर रिमूवल का जो थोड़ा  कॉन्प्लिकेटेड सर्जरी थी सुबह जब राउंड के लिए डॉक्टर  आए हुए थे नीता भी उनके उसके पापा के साथ खड़ी हुई थी डॉ दिनेश जूनियर थे  डॉक्टर नवीन के राउंड के लिए आए जैसे ही डॉक्टर ने पूछा उनको क्या क्या बीमारी हुई थी डॉ दिनेश ने उनको डिटेल्स बताएं . नीता ने देखा के पापा को एक बार जॉन्डिस हुआ था वह डॉक्टर दिनेश बोलना भूल गए.डॉक्टर नवीन ने दिनेश को बोला तुम भूल कैसे सकते हो दिनेश ने उस समय नीता को बहुत अजीब नजरों से देखा नीता थोड़ा डर ही गई थी उसे लगा कि उसे मुंह खोलना नहीं चाहिए था पर वह भी क्या करती हो उसे अपने पापा की जान बचानी थी लगा कि एक छोटी सी भी गलती उसके पापा के ऑपरेशन में खलल डाल सकती है । उस दिन उसके पापा का ऑपरेशन अच्छे से हो गया .

नीता चुप-चाप वहीं पर बैठी हुई थी उसकी तबीयत  ठीक नहीं चल रही थी उसके हाथ में घाव था जो सही नहीं हो रहा था वह सिस्टर के पास गई और थोड़ा रूई मांगा क्योंकि खून आ रहा था. उसे देख सिस्टर ने उससे पूछा क्या करती हो?
कौन सी क्लास में हो ?
क्लास में नहीं मैं तो फर्स्ट ईयर मास्टर की पढ़ाई करती हूं सिस्टर हंस कर बोली यहां पर लोग तुम्हें बहुत छोटा समझते हैं
नीता हस्ती हुई वहां से चली गई.
उसके बाद शुरू हुआ डॉक्टर दिनेश नीता का छुपा छुपी का खेल छुप-छुप के देखते थे डॉक्टर दिनेश  नीता चुपचाप से बैठती थी अपनी मां के साथ गप्पे मारती थी और वह आते जाते डॉक्टर दिनेश को देखती थी डॉक्टर दिनेश मोबाइल की आर मैं उससे देखना शुरु कर देते.
नीता के मां बहुत अच्छे से देखा कि डॉक्टर दिनेश उसे पसंद करते हैं शायद मैंने कभी कुछ बोला नहीं.1 हफ्ते में उसके पापा  को हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया गया.
उसे आज भी याद है डॉ दिनेश नीचे खड़े हुए थे एक बुक लेकर दिख तो ऐसा रहा था कि वह लाइब्रेरी से आ रहे थे पर नीता समझ गई उनका दूसरा कुछ मतलब है.
उसके पापा कुछ परेशानी महसूस कर रहे थे ऑपरेशन के बाद दिनेश उसके पापा के पास गए और बहुत सरलता से उन्हें समझ आया क्या करना चाहिए यही तो कुछ बात भाती थी नीता को डॉक्टर दिनेश .

नीता के लिए डॉक्टर देने शायद डॉक्टर थे उसे हमेशा लगता था कि यह डॉक्टर जरूर कुछ बन पाएंगे थोड़ी देर बाद गाड़ी आई बोला पापा चलो गाड़ी आ गई. पीछे से मुड़ के देखा डॉक्टर दिनेश tata बोल रहे थे पहली बार नीता ने भी उसे हंसकर बाय बोला यह शायद शुरुआत थी उस नूतन रिश्ते की.

जिंदगी सही चल रही थी नीता ने अपना कॉलेज ज्वाइन किया फिर एक दिन अचानक उसे एक फोन कॉल मिला उस टाइम पर ट्रूकॉलर नहीं हुआ करता था जब देखा एक अननोन नंबर था उसने बात करने की कोशिश की तो वहां से कुछ आवाज नहीं आता था वह थोड़ी असमंजस में पड़ गई कि यह किसका नंबर हो सकता है 2 दिन 3 दिन 4 दिन नंबर वालों से ज्यादा परेशान तो करता नहीं था बस उसकी आवाज सुनता था उसने ब्लॉक करने की भी कोशिश की थी बट ब्लॉक पर नहीं हो रहा था नंबर दूसरे नंबर से फोन आया था उसे थोड़ा डर भी लगता था फिर 10 दिन बाद उसके पापा का फिर से वहां पर हॉस्पिटल में बुलाया गया है ,नीता अपने क्लास में थी इसकी मम्मी का अचानक से फोन आया हड़बड़ाहट में बोलेंगे तो तुम्हारे पापा के फाइल नहीं मिल रहे हैं .
नीता ने बोला ,"ऐसा कैसे हो सकता है हॉस्पिटल में क्या रिकॉर्ड कैसे कट गया वह सकते हैं?"
बाद मैं उसकी  मां चुपचाप रह गई.
जब नीता हॉस्पिटल गई उसने अपने सामने डॉक्टर दिनेश को पाया दोनों की आंखें मिली दोनों ने एक स्माइल एक्सचेंज इससे ज्यादा वह कभी नहीं बात करते दोनों एक दूसरे से.

घर आकर नेता की मम्मी ने उसे कहा वह फाइल का मुझे सुराग मिला ऐसा सुना गया कि लास्ट में डॉक्टर दिनेश ने वह फाइल लिया था पढ़ने के लिए, चुप चाप सुनते गई नीता को थोड़ा समझा कि क्या हो सकता है नीता ने सोच लिया उस दिन जो उसने डॉक्टर दिनेश को डांट पड़ गई थी डॉक्टर नवीन से वही उसका बदला है पर वह वही सोच रही थी उसके पापा के फाइल में ऐसा क्या हो सकता है कि उसे छोरी करके कुछ मिलेगा थोड़ा सोचने के बाद उसको लगा कि उसके पापा तो काफी बीमार पड़ चुके थे और शायद से थोड़ी कॉन्प्लिकेटेड उनका केस हिस्ट्री हुआ करता था कुछ मिला रहेगा या पढ़ने के लिए लिया गया था पर वह बात उसके जहन में आ गई कि डॉक्टर दिनेश,इसने उसके पापा की फाइल घुमाई

वह फोन आता जाता रहता था सनी ज़रूर होती थी उसने कभी इतना ध्यान नहीं दिया उसे अचानक याद आया फाइल में नाम नंबर था और उस घटना उस दिन के बाद सेव होना फोन नंबर वह फोन से आया करता था पर उसे यह नहीं समझ में आ रहा था फोन नंबर कर लेना ही था डॉक्टर दिनेश को तो पूछ लेते उसके पापा की फाइल क्यों चुराई , उस घटना का जिक्र उसकी मां ने उसके पापा को किया हंस के बोले छोड़ दो अगर मैं डॉक्टर नवीन को बोलूंगा तो डॉक्टर दिनेश सर हो सकता है हमारे पास तो कोई पक्की सबूत का सबूत भी तो नहीं है कि उन्होंने ली अगर लिया भी रहेगा तो पड़ा है पढ़ने के लिए आशा से दूसरी दूसरा और भी कोई स्टूडेंट हो ही सकता है जिसने उससे लिया रहेगा छोड़ दो यह बात जाने दो नीता को थोड़ा गुस्सा आया था वह डॉक्टर नवीन की फेवरेट हुआ करती थी डॉक्टर नवीन उसे पर्सनली भी जानते थे

थोड़े दिनों में हाथ का घाव गहरा हो रहा था नीता को समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करें के पापा के कैंसर का भी इलाज चल रहा था उसने एक दिन डॉक्टर नवीन को हाथ दिखाया , उन्होंने बोला इसका तो ऑपरेशन करना ही होगा. एक कोने से डॉक्टर दिनेश सब सुन रहे थे नीता भाग डॉक्टर नवीन के घर से निकल कर रो ही रही थी क्योंकि कुछ ही दिन में उसके मास्टर्स के फर्स्ट ईयर के एग्जाम थे नीता की मां उसके साथ बैठी थी उसने देखा डॉक्टर दिनेश है और उसकी मम्मी को समझाने लगता है कि आप डरिए मत बहुत छोटा सा ऑपरेशन है नीता के लिए इतना भी कोई बोले वह बहुत था.
डॉ नवीन ने बोला ऑपरेशन से पहले तुम्हें रोज इससे ड्रेसिंग करवाने के लिए आना पड़ेगा तुम एक बार हॉस्पिटल आ जाया करो नीता ने कहा ठीक है नीता ड्रेसिंग के लिए आया करती थी मजेदार बात थे जिसके पास भी जाते थे उसको डॉक्टर दिनेश के पास भेज देता था गणेश भी शांति से उसका ड्रेसिंग करवाता था डॉ दिनेश की ड्रेसिंग करने से ज्यादा उसका चेहरा देखा करते थे .कुछ बोल नहीं पाती थी आखिर वह डॉक्टर के पास जो बैठी हुई थी .
ऐसा नहीं था कि नीता को डॉक्टर दिनेश पसंद नहीं थे उसने कभी सोचा ही नहीं उसको तथा डॉक्टर दिनेश बहुत अच्छे डॉक्टर है इसके लगता था से नहीं कर पाती थी ऐसी उसके पापा के ट्रीटमेंट और उसकी जिंदगी चलती गई

करीबन 1 साल बाद नीता के पापा भी थोड़ा ठीक हो गए कैंसर से. नीता भी अपने सेकंड ईयर की पढ़ाई कर रही थी मास्टर की.
एक दिन किमो लेते वक्त उसके पापा हॉस्पिटल में एडमिट थे तभी नीता कैंटीन में आई रात का खाना खाने उसने देखा डॉक्टर दिनेश उनके और दोस्तों के साथ आए हुए थे उसने कुछ ध्यान नहीं दिया अपना खाना लेकर कोने में बैठ गई फिर उसके साथ बहुत अजीब घटना घटी डॉ दिनेश उसके साथ आकर बैठ गए पर ध्यान नहीं दिया डॉ दिनेश ने हेलो कहा नीता ने भी कहा हेलो डॉक्टर फिर ऐसे डॉक्टर दिनेश ने बोला तुम्हारी पढ़ाई हो गई ? वह बोली हां कल प्रैक्टिकल सबमिशन का लास्ट डे है डॉक्टर के नहीं बोला अभी मेरा भी यह लास्ट ईयर है इसके बाद हम सब अलग अलग हो जाएंगे उसने बोला आप लोग क्यों पढ़ाई हो गई अच्छी बात है ना, आप भी सर्जन बन जाओगे .
दिनेश ने हंसकर कहा पर यह भी सच है इस हॉस्पिटल में अब से नहीं रहेंगे. नीता ने पूछा मेरे पापा को बहुत अच्छे से देखा था धन्यवाद इसलिए पता नहीं अचानक पूछा अच्छा मेरे पापा भी ठीक है ना पहले से वह ठीक हो जाएंगे ना कैंसर काफी हद तक कम हो चुका है अब तो कंट्रोल है ना
दिनेश ने कहा हां अच्छे हैं थोड़े दिनों में
दिनेश ने फिर पूछा " क्या मैं तुम्हें एक सवाल पूछ सकता हूं ?
नीता हरभरा कर बोली "हां पूछ लीजिए"
दिनेश ने पूछा "अच्छा नीता मैं कैसा लगता हूं?" नीता तो गुस्से में आ गई " कैसा लगता हूं क्या आप बहुत अच्छे डॉक्टर हो बड़े सर्जन बनोगे आप मेरे पापा को बहुत अच्छे से देखभाल करते हो," दिनेश ने हंसकर कहा वह तो मुझे पता है तुम्हें कैसे लगता हूं ?
नीता को पता था कभी ना कभी यह दिन आएग...कोई जवाब नहीं था या कुछ कहना नहीं चाहती थी नीता ने उससे पूछा अच्छा क्या मैं आप को एक सवाल पूछ सकती हूं बोला हां पूछो" आपको मैं ही क्यों पसंद आई और भी कितने डॉक्टर्स है इन लोग तो बहुत अच्छे हैं डॉक्टर दिनेश ने हंसकर कहा तुम्हारा कॉन्फिडेंस मुझे भाया नॉन मेडिकल होकर तुमने दिन से डॉक्टर नवीन को केस हिस्ट्री बताई और इस तरीके से तुमने सब को संभाला उस टाइम मुझे वह बहुत भाया.
नीता बोली "उसमें क्या बड़ी बात है ?"
दिनेश ने बोला "यही बड़ी बात है"

नीता ने बोला अच्छा बात बोलिए तो मेरे पापा की फाइल किसने ली थी ऐसे सुनने में आया था कि आपने पढ़ने के लिए लिया था डॉ दिनेश सर झुका कर बोले हां थी पढ़ने के लिए नहीं अरे नंबर देखने के लिए मैंने सोचा था या नहीं था मैंने सही जगह रख दिया उसके बाद मुझे कोई अंदाजा नहीं वह कहां गायब हो गया नीता थोड़े गुस्से में आकर बोली यही सुनना था मुझे, आपको पता है आपके लिए मेरी मम्मी और पापा को कितना घूमना पड़ा था कितना जरूरी था. आपको अगर  नंबर मांगा था तो मुझसे पूछ लेते मैं दे देती आपको फाइल छुपाने की क्या जरूरत थी? आपके मेडिकल एथिक्स नहीं है यह. दिनेश चुपचाप सुनता गया दिनेश के पास कोई जवाब नहीं था इसका!!! दिनेश आखिर में बोला कल तुम्हारे पापा डिस्चार्ज हो रहे हैं तुम कॉलेज के बाद मेरे से एक बार मिल लेना परसों वैलेंटाइंस डे है मैं तुमसे एक बार मिलना चाहता हूं.

नीता कुछ कह नहीं पाई  उसने बोला ठीक है मैं देखती हूं मेरा खाना हो चलिए मैं जाती हूं दिनेश मुस्कुराया नीता ने फ्लैट रखते हुए देखा दिनेश के दोस्त कैंटीन में एक तरफ उसके साथ हंस रहे थे नीता को पता था कि इन लोगों में हंसी मजाक रहता है और दिनेश थोड़ी शांत मिजाज के थे पर उनके दोस्त एक बार उनसे मजाक किया करते थे नीता को लगा कि शायद कोई शर्त लगा था या कुछ उसने उसने सोचा नहीं पूरी रात भर सोचती रही कल वह जाए या ना जाए उसके लिए प्रेम कहानी भी थी कहीं ना कहीं उसे लगा कि यह तो डॉक्टर बन जाएगा पर अगर मैंने अपनी पढ़ाई अच्छे से नहीं की तो मेरे सपने का क्या मेरा कैरियर अपने करियर को बहुत हां मानती थी उसको पता था उसके पापा ज्यादा दिन नहीं है उसे कुछ बनना है उसके पापा का वह सपना पूरा करना है और उसे डर था डॉक्टर दिनेश का यह मजाक है कल वह घर गई तो एक मजाक बन जाएगी कॉलेज में कई बार अपने दोस्तों के साथ ऐसा मजाक होते हुए देखा है शायद उसने अपने दिल को कभी सोचना ही नहीं दिया कभी प्यार में विश्वास नहीं करती थी चलिए प्यार उसके मम्मी पापा उसका और सपना था

अगले दिन जब वह हॉस्पिटल में गई डॉक्टर दिनेश को देखा वह कुछ नहीं बोली पर हां उस दिन वह सज संवर  जरूर गई थी आज डॉक्टर दिनेश के साथ थोड़ी अलग थी डॉक्टर एक मुस्कुराहट थी नीता भी मुस्कुराए करीबन एक डेढ़ घंटे में उसके पापा का डिस्चार्ज हो गया उसने टैक्सी बोलाई पापा के साथ घर चली गई.
घर जाने के लिए तैयार हो गए जाते वक्त उसने देखा डॉ दिनेश दूर एक जगह खड़े उसका इंतजार कर रहे थे नीता ने चुपचाप देखा पर कुछ देर नीता की आंखों में थोड़ी आंसू थे पर शायद उसके मन की दृढ़ता कुछ बनना बहुत ज्यादा जरूरी था .

आज की भूल नहीं पाई डॉक्टर दिनेश को उसके बाद भी फोटो मिले थे होने के बाद डॉक्टर नवीन के पास गई हो पापा को लेकर डॉक्टर नवीन ने बोला एक काम करो तुम बाहर आ जाओ तुम्हारे पापा को लेकर उनका एक टेस्ट होना बाकी है नीता ने बोला नहीं आ सकती अजनबी ने बोला क्यों इंटरव्यू हंसकर बोले क्या चीज का इंटरव्यू मुझे कॉलेज में पढ़ाने का मौका मिला है कॉलेज के प्रोफेसर के लिए इंटरव्यू उसने बस देखा डॉक्टर दिनेश कुछ लिखते लिखते रुक गए तूने सुना और हंस कर अपना काम करते गया नीता चुपचाप निकल गई अपने पापा के साथ अगले दिन उसने उसकी मम्मी के साथ वह हॉस्पिटल जा रही थी तब सो रही थी डॉ दिनेश अपने दोस्तों के साथ मजे कर रहे थे नीता ने देख कर भी अनदेखा कर दिया उनको लिफ्ट पर ऊपर चले गए आते वक्त उसे डॉक्टर दिनेश मिले डॉ दिनेश ने कहा ऑल द बेस्ट नीता चुपचाप हंसकर निकल गई नीता और दिनेश की आखिरी मुलाकात थी अकेले दिनेश कोई पहला प्यार भी नहीं था पर कहीं ना कहीं उसके लिए वह एक एहसास था

नवीन के पास नीता का आना जाना चाहता ही था अपना मेंटर मानती थी भारत में कई कहीं डॉक्टर्स के उसे डॉक्टर दिनेश के बारे में पता चलता रहता था. थोड़े दिनों में आपके पापा गुजर गया और नीता की जिंदगी में बहुत  बदल गया नीता अभी पुणे में रहती है वही करती काम करती है अपनी मां के साथ उसने अपनी सुंदर दुनिया बसाई है देखते-देखते 5-6 साल ऐसे ही गुजर गए , इस बीच नीता ने डॉ दिनेश को पुणे में शायद से एक दो बार देखा था पर सोचती थी उसकी वह गलतफहमी थी उसे यह बात भी पता थी कि शायद डॉक्टर दिनेश वही के ही रहने वाले थे.

उसने कभी ध्यान नहीं दिया,नीता का अचानक एक दिन स्कूटर एक्सीडेंट हो गया अचानक उसे समझ नहीं आ रहा है कि क्या करें उसके घर के नजदीकी एक हॉस्पिटल में इमरजेंसी वार्ड मैं गई डॉक्टर की लिस्ट को देख कर वह  थोड़ा  झिझक गई जब उसने डॉक्टर दिनेश का नाम देखा वहां पर उसे लगा नाम के तो तो डॉक्टर हो ही सकते हैं  जख्म इतना ज्यादा दर्द दे रहा थ .डॉक्टर दिनेश को देखा मन ही मन उसे लगा शायद डॉक्टर दिनेश उसे भूल ही गए रहेंगे उसने अपना ध्यान नहीं दीया उसने अपना केस बताया तभी डॉक्टर दिनेश ने सारी बातें काट कर पूछा कैसे हैं तुम्हारे पापा. नीता ने कहा वह भी नहीं रहे ,डॉ दिनेश सर झुका कर बोले आई एम सॉरी उन्होंने नीता को एडमिट कर लिया.

उसने यह घटना  मम्मी से कहा, उसकी मां यह सुनकर थोड़ी हैरान हुई क्योंकि नीता ने प्रपोजल की बात काफी समय के बाद उसकी मां से बात बताई थी और इस बात पर की मां ने कहा था तुमने तब क्यों नहीं कहा मैं हम डॉक्टर दिनेश से बात करते नीता आज भी बोलती हैं तब मेरे लिए मेरा कैरियर और मेरे पापा के सपने सबसे जरूरी था और वह डॉक्टर का मजाक था उसके सारे दोस्त उसके साथ थे.

आज नीता और डॉक्टर दिनेश की बातें अलग थी पहले जहां हिचकिचाहट थी आज दोस्ती तो नहीं बोल सकते पर दोनों बात करते हैं करीब 1 हफ्ते बाद नीता फिर से जब गई डॉक्टर दिनेश न कहा आप 2 हफ्ते बाद आना मेरे पास मैं कांफ्रेंस के लिए जा रहा हूं अगर कुछ लगा तो आप मेरा नंबर ले सकती हैं और पर कॉन्टेक्ट कर लेना नीता को फोन की बात सुनकर हंसी आई उसने कहा ठीक है फोन नंबर दिनेश चुपचाप रह गया दिनेश ने कहां आपका नंबर दे दो मैं सेव कर लेता हूं मिस कॉल दे देता हूं नीता ने बोला नहीं कोई प्रॉब्लम नहीं मेरे पास आपका नंबर है कांटेक्ट कर लूंगी अगर लगेगा तो दिनेश थोड़ा चुप हो गया जैसे आपकी मर्जी रूम से निकलते वक्त नीता हंसकर बोले मेरा नंबर बदला नहीं अब तक इस बात पर दिनेश हलके से मुस्कुराएं वहां से चली आई

आज नीता बदल चुकी थी उसे बस देखना था कि डॉक्टर दिनेश आज फिर से पसंद करते हैं क्या नहीं और उस रात उसे वह जवाब मिल गया जब फोन की घंटी बजी truecaller में एक नाम आया डॉ दिनेश नीता ने जब वह फोन उठाया वहां से बोला हेलो दिनेश बोल रहा हूं क्या कल हम मिल सकते हैं? नीता का जवाब था आपको WhatsApp करती हो लोकेशन..

यह कैसी कहानी है जो शायद से दर्द के रिश्ते से शुरू होकर प्यार के रिश्ते मैं खत्म होती है.

Short story 1-Chotti si Muskaan

मैं सपना हूं मेरे अलग सपने हैं जो आपसे भी मिलते झूलते हैं. मैंने अपने इस छोटे से जीवन में बहुत कुछ देखा है महसूस किया है समझा है उन छोटे-छोटे हिस्सों को मुझे लगता है कि मैं आपके साथ शेयर कर सकती हूं. अपने छोटी कहानियों से कुछ नए रंग भर सकती हूं क्योंकि इन कहानियों से मैंने भी कुछ सीखा है जाना है

1. छोटी सी मुस्कान
वो इन दोनों की बात है मैं अपने 12वीं परीक्षा के बाद कुछ कारण से मुंबई के एक बड़े हॉस्पिटल में गई थी, हां याद आया मेरे दोस्त माया के पापा का ऑपरेशन था वह अभी आईसीयू में थे मैं अपने दोस्त के साथ बातें कर रही थी कि हमने देख एक छोटी सी लड़की हमें देख रही थी वह उन दिनों की बात है जब मोबाइल फोन साधारण सा हुआ करता था स्मार्टफोंस तो थे ही नहीं बस याद है kal Ho Naa Ho का वह रिंगटोन बहुत देर से मैं और मेरे दोस्त एक दूसरे से बात कर रहे थे मेरी दोस्त बार-बार उस छोटी सी लड़की को देख रही थी मैंने उससे पूछा क्या देख रही हो मेरे दोस्त ने कहां वह रोज सुबह आती है शायद उसका कोई हॉस्पिटल में भर्ती है

हम दोनों ने जरा झिझकते हुए उस लड़की को बुला ही लिया उसके साथ शायद उसके नाना या दादाजी थे वह आई हमारे पास और हमसे कहा दीदी पहले फोन बताओ मेरे पास तो फोन था मैंने उसे दिखाया ज्यादा कुछ तो गेमस नहीं थे तभी हमने छोटी बच्ची से पूछा उसका नाम उसने हंस कर कहा मेरा नाम खुशी है मेरी दोस्तों से पूछा कौन सी क्लास में पढ़ती हो उसने बोला नर्सरी दीदी कह नहीं सकते थे इतनी प्यारी बच्ची आज की कीमत सरलतम मुझे याद है मेरे दोस्त उसको पूछा क्यों आए हो यहां बच्चों की घूमने की जगह नहीं है वह हंस कर बोली घूमने नहीं आई हूं पापा को देखने आए हैं परेशान होकर मैंने भी उससे पूछा क्या हुआ तुम्हारे पापा को? मोबाइल से खेलते खेलते उसने अपनी पुत्री से andaaz में कहा वेंटिलेटर मैं मेरे पापा मैं और मेरी दोस्त चुप रह गए क्योंकि वेंटीलेटर एक ऐसा शब्द है जो अच्छे खासे लोगों को डरा सकता है शायद ही उस बच्चे की मासूमियत ही थी जिसने मुश्किल शब्द को इतनी आसानी से बोल पाया कर दिया हम दोनों को वह देखते रहे और हम से बोली डरो मत कुछ नहीं हुआ है मैंने देखा है एक अजीब सा मास्क डाला है पापा के मुंह पर ठीक हो जाएंगी हम दोनों ने हंसकर कहा हां ठीक हो जाएंगे शायद शायद उसकी वह सरलता ही थी जिसने इतनी बड़ी चीज को ऐसे देखा मेरी दोस्त बहुत ज्यादा डरी हुई थी यह जानते हुए भी उसके पापा ज्यादा बीमार नहीं है बस ऑपरेशन के बाद उन्हें सही करने के लिए थोड़े वक्त के लिए आईसीयू मैं रखा गया था.

उस दिन के बाद हमें खुशी कभी नहीं देखी खुशी ने हमारे अंदर खुश रहना सिखा दिया शायद बच्चों की यही सरलता है जो हमें बड़ों को सीखना चाहिए.

यह एक कहानी हॉस्पिटल की मेरे पास से थोड़े बहुत किस्से हैं जो मैं आप लोगों से प्यार करना चाहती हो.

Friday, December 8, 2017

Paheli

My new one another attempt to use to words to describe a confused state of mind but where one want another one to win...

96.Paheli

Teri Jeet main meri Jeet,
Teri haar main meri Haar,
Jane ye kaisi rit hai,
Jahan haar bas hai mere dil ki...

Tere hone se hansi meri,
Tere duriyon se meri duniya adhuri;
Sath naa hoke bhi hai tu sath mere,
Ye kaisi paheli mere dil ki??

Mera vyaham hai yaa hai tu mera sathi
Bas is uljhan main meri duniya uljhi,
Bhula kar bhi na bhula paon tujhe,
Sach yehi hai Jeet teri...
 
(C)2017 Ritika Guha

Monday, November 13, 2017

Akelapan

My new one,a different attempt.A take on depression.A voice of a person who is suffering and urging to come out...Hope to be liked...

                                      

Sunday, October 22, 2017

Nayi Saans

           !!!Nayi Saans!!!
Baat bas un dino ki hai,
Jab haste the hum bina camera ke;
Choti mulakate ban jaati thi yaadein,
Naa thi bas selfie ki aadatein...

Kitaben thi dost,naa tha facebook ka post;  Like Karne ka tha ek alag andaz jahan tha pyaar ka ehsaas.....
Chitiyaan thi paas rehne ka bahana,
Aur Whatsapp ke bina chalti thi saans....

Parivartan hai aaj,Jo laa raha alag andaaz;
Bina bole hi,angutha hai like ka andaaz... Galat kuch bhi nahin,bas sabko group main jorne ka ek bahana hai;
Bina mile ek sath rehne ka fasana hai...

Moner kotha-Bondhu Mane Ki?12 May,2025

Jiboner onek charai uthrai te Prayee nijeke dekheche Kintu eibaar ektu alada Jokhon nijeke pechone ghure dekhi, Bodhaye khub blessed bhabhi,...