2.दर्द का रिश्ता
पुरानी कहानी है जहां छोटी सी लड़की से बहुत कुछ सीखा उसने सीखा यह भी एक हॉस्पिटल की घटना है एक प्रेम कहानी है थोड़ी अलग सी अजीब सी पी है
इस कहानी के दो पात्र हैं एक है नीता और दूसरा है दिनेश डॉ दिनेश , नीता अपने मास्टर की फर्स्ट ईयर की पढ़ाई करती थी डॉक्टर दिनेश सर्जरी की.
नीता 1 दिन अपने पापा के कैंसर के इलाज के लिए मुंबई के बड़े हॉस्पिटल गई हुई थी डॉ दिनेश वहां पर अपनी सर्जरी सर्जरी की पढ़ाई करते थे.
नीता आज भी उस पहले दिन की मुलाकात नहीं भूल सकती डॉ नवीन जो डॉक्टर दिनेश के सीनियर हुआ करते थे ने कहा नीता के पापा को हॉस्पिटल में एडमिट करना होगा और उन्होंने डॉक्टर दिनेश से मिलने बोला
हॉस्पिटल में एडमिट होने के बाद डॉ दिनेश उसके पापा का चेकअप करने आए और उनकी केस हिस्ट्री पूछी नीता के पापा बोले जितना उनको पता था नीता इन मामलों में जरा ज़्यादा ही जानती थी उसने बड़ी ही सरलता और सटीकता से उसके पापा के केस हिस्ट्री को बताया डॉक्टर दिनेश सिर्फ सुनते गए
नीता की भी तबीयत ठीक नहीं हुआ करती थी वह सारा दिन अपनी पढ़ाई हॉस्पिटल में बैठकर करती थी उसे देखती थी डॉक्टर दिनेश उसे छुप छुप कर देखा करते थे सोच समझ कर भी समझ समझना नहीं चाहती थी यह बात उसकी मम्मी पापा ने देखी पर कुछ बोलते नहीं थे डॉक्टर दिनेश कि एक बात से बहुत ज्यादा प्रभावित हुई जो था किसी भी केस हिस्ट्री को पढ़ना . डॉक्टर दिनेश कितना मन लगाकर किसी भी पेशेंट की फाइल को पढ़ते दिनेश के साथ उनके और भी सहयोगी थे जो वहां पर पढ़ाई करते थे अरुण के साथ तो मजाक मस्ती चलती रहती थी
वह दिन है जब नीता के पापा का पहला ऑपरेशन था कैंसर रिमूवल का जो थोड़ा कॉन्प्लिकेटेड सर्जरी थी सुबह जब राउंड के लिए डॉक्टर आए हुए थे नीता भी उनके उसके पापा के साथ खड़ी हुई थी डॉ दिनेश जूनियर थे डॉक्टर नवीन के राउंड के लिए आए जैसे ही डॉक्टर ने पूछा उनको क्या क्या बीमारी हुई थी डॉ दिनेश ने उनको डिटेल्स बताएं . नीता ने देखा के पापा को एक बार जॉन्डिस हुआ था वह डॉक्टर दिनेश बोलना भूल गए.डॉक्टर नवीन ने दिनेश को बोला तुम भूल कैसे सकते हो दिनेश ने उस समय नीता को बहुत अजीब नजरों से देखा नीता थोड़ा डर ही गई थी उसे लगा कि उसे मुंह खोलना नहीं चाहिए था पर वह भी क्या करती हो उसे अपने पापा की जान बचानी थी लगा कि एक छोटी सी भी गलती उसके पापा के ऑपरेशन में खलल डाल सकती है । उस दिन उसके पापा का ऑपरेशन अच्छे से हो गया .
नीता चुप-चाप वहीं पर बैठी हुई थी उसकी तबीयत ठीक नहीं चल रही थी उसके हाथ में घाव था जो सही नहीं हो रहा था वह सिस्टर के पास गई और थोड़ा रूई मांगा क्योंकि खून आ रहा था. उसे देख सिस्टर ने उससे पूछा क्या करती हो?
कौन सी क्लास में हो ?
क्लास में नहीं मैं तो फर्स्ट ईयर मास्टर की पढ़ाई करती हूं सिस्टर हंस कर बोली यहां पर लोग तुम्हें बहुत छोटा समझते हैं
नीता हस्ती हुई वहां से चली गई.
उसके बाद शुरू हुआ डॉक्टर दिनेश नीता का छुपा छुपी का खेल छुप-छुप के देखते थे डॉक्टर दिनेश नीता चुपचाप से बैठती थी अपनी मां के साथ गप्पे मारती थी और वह आते जाते डॉक्टर दिनेश को देखती थी डॉक्टर दिनेश मोबाइल की आर मैं उससे देखना शुरु कर देते.
नीता के मां बहुत अच्छे से देखा कि डॉक्टर दिनेश उसे पसंद करते हैं शायद मैंने कभी कुछ बोला नहीं.1 हफ्ते में उसके पापा को हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया गया.
उसे आज भी याद है डॉ दिनेश नीचे खड़े हुए थे एक बुक लेकर दिख तो ऐसा रहा था कि वह लाइब्रेरी से आ रहे थे पर नीता समझ गई उनका दूसरा कुछ मतलब है.
उसके पापा कुछ परेशानी महसूस कर रहे थे ऑपरेशन के बाद दिनेश उसके पापा के पास गए और बहुत सरलता से उन्हें समझ आया क्या करना चाहिए यही तो कुछ बात भाती थी नीता को डॉक्टर दिनेश .
नीता के लिए डॉक्टर देने शायद डॉक्टर थे उसे हमेशा लगता था कि यह डॉक्टर जरूर कुछ बन पाएंगे थोड़ी देर बाद गाड़ी आई बोला पापा चलो गाड़ी आ गई. पीछे से मुड़ के देखा डॉक्टर दिनेश tata बोल रहे थे पहली बार नीता ने भी उसे हंसकर बाय बोला यह शायद शुरुआत थी उस नूतन रिश्ते की.
जिंदगी सही चल रही थी नीता ने अपना कॉलेज ज्वाइन किया फिर एक दिन अचानक उसे एक फोन कॉल मिला उस टाइम पर ट्रूकॉलर नहीं हुआ करता था जब देखा एक अननोन नंबर था उसने बात करने की कोशिश की तो वहां से कुछ आवाज नहीं आता था वह थोड़ी असमंजस में पड़ गई कि यह किसका नंबर हो सकता है 2 दिन 3 दिन 4 दिन नंबर वालों से ज्यादा परेशान तो करता नहीं था बस उसकी आवाज सुनता था उसने ब्लॉक करने की भी कोशिश की थी बट ब्लॉक पर नहीं हो रहा था नंबर दूसरे नंबर से फोन आया था उसे थोड़ा डर भी लगता था फिर 10 दिन बाद उसके पापा का फिर से वहां पर हॉस्पिटल में बुलाया गया है ,नीता अपने क्लास में थी इसकी मम्मी का अचानक से फोन आया हड़बड़ाहट में बोलेंगे तो तुम्हारे पापा के फाइल नहीं मिल रहे हैं .
नीता ने बोला ,"ऐसा कैसे हो सकता है हॉस्पिटल में क्या रिकॉर्ड कैसे कट गया वह सकते हैं?"
बाद मैं उसकी मां चुपचाप रह गई.
जब नीता हॉस्पिटल गई उसने अपने सामने डॉक्टर दिनेश को पाया दोनों की आंखें मिली दोनों ने एक स्माइल एक्सचेंज इससे ज्यादा वह कभी नहीं बात करते दोनों एक दूसरे से.
घर आकर नेता की मम्मी ने उसे कहा वह फाइल का मुझे सुराग मिला ऐसा सुना गया कि लास्ट में डॉक्टर दिनेश ने वह फाइल लिया था पढ़ने के लिए, चुप चाप सुनते गई नीता को थोड़ा समझा कि क्या हो सकता है नीता ने सोच लिया उस दिन जो उसने डॉक्टर दिनेश को डांट पड़ गई थी डॉक्टर नवीन से वही उसका बदला है पर वह वही सोच रही थी उसके पापा के फाइल में ऐसा क्या हो सकता है कि उसे छोरी करके कुछ मिलेगा थोड़ा सोचने के बाद उसको लगा कि उसके पापा तो काफी बीमार पड़ चुके थे और शायद से थोड़ी कॉन्प्लिकेटेड उनका केस हिस्ट्री हुआ करता था कुछ मिला रहेगा या पढ़ने के लिए लिया गया था पर वह बात उसके जहन में आ गई कि डॉक्टर दिनेश,इसने उसके पापा की फाइल घुमाई
वह फोन आता जाता रहता था सनी ज़रूर होती थी उसने कभी इतना ध्यान नहीं दिया उसे अचानक याद आया फाइल में नाम नंबर था और उस घटना उस दिन के बाद सेव होना फोन नंबर वह फोन से आया करता था पर उसे यह नहीं समझ में आ रहा था फोन नंबर कर लेना ही था डॉक्टर दिनेश को तो पूछ लेते उसके पापा की फाइल क्यों चुराई , उस घटना का जिक्र उसकी मां ने उसके पापा को किया हंस के बोले छोड़ दो अगर मैं डॉक्टर नवीन को बोलूंगा तो डॉक्टर दिनेश सर हो सकता है हमारे पास तो कोई पक्की सबूत का सबूत भी तो नहीं है कि उन्होंने ली अगर लिया भी रहेगा तो पड़ा है पढ़ने के लिए आशा से दूसरी दूसरा और भी कोई स्टूडेंट हो ही सकता है जिसने उससे लिया रहेगा छोड़ दो यह बात जाने दो नीता को थोड़ा गुस्सा आया था वह डॉक्टर नवीन की फेवरेट हुआ करती थी डॉक्टर नवीन उसे पर्सनली भी जानते थे
थोड़े दिनों में हाथ का घाव गहरा हो रहा था नीता को समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करें के पापा के कैंसर का भी इलाज चल रहा था उसने एक दिन डॉक्टर नवीन को हाथ दिखाया , उन्होंने बोला इसका तो ऑपरेशन करना ही होगा. एक कोने से डॉक्टर दिनेश सब सुन रहे थे नीता भाग डॉक्टर नवीन के घर से निकल कर रो ही रही थी क्योंकि कुछ ही दिन में उसके मास्टर्स के फर्स्ट ईयर के एग्जाम थे नीता की मां उसके साथ बैठी थी उसने देखा डॉक्टर दिनेश है और उसकी मम्मी को समझाने लगता है कि आप डरिए मत बहुत छोटा सा ऑपरेशन है नीता के लिए इतना भी कोई बोले वह बहुत था.
डॉ नवीन ने बोला ऑपरेशन से पहले तुम्हें रोज इससे ड्रेसिंग करवाने के लिए आना पड़ेगा तुम एक बार हॉस्पिटल आ जाया करो नीता ने कहा ठीक है नीता ड्रेसिंग के लिए आया करती थी मजेदार बात थे जिसके पास भी जाते थे उसको डॉक्टर दिनेश के पास भेज देता था गणेश भी शांति से उसका ड्रेसिंग करवाता था डॉ दिनेश की ड्रेसिंग करने से ज्यादा उसका चेहरा देखा करते थे .कुछ बोल नहीं पाती थी आखिर वह डॉक्टर के पास जो बैठी हुई थी .
ऐसा नहीं था कि नीता को डॉक्टर दिनेश पसंद नहीं थे उसने कभी सोचा ही नहीं उसको तथा डॉक्टर दिनेश बहुत अच्छे डॉक्टर है इसके लगता था से नहीं कर पाती थी ऐसी उसके पापा के ट्रीटमेंट और उसकी जिंदगी चलती गई
करीबन 1 साल बाद नीता के पापा भी थोड़ा ठीक हो गए कैंसर से. नीता भी अपने सेकंड ईयर की पढ़ाई कर रही थी मास्टर की.
एक दिन किमो लेते वक्त उसके पापा हॉस्पिटल में एडमिट थे तभी नीता कैंटीन में आई रात का खाना खाने उसने देखा डॉक्टर दिनेश उनके और दोस्तों के साथ आए हुए थे उसने कुछ ध्यान नहीं दिया अपना खाना लेकर कोने में बैठ गई फिर उसके साथ बहुत अजीब घटना घटी डॉ दिनेश उसके साथ आकर बैठ गए पर ध्यान नहीं दिया डॉ दिनेश ने हेलो कहा नीता ने भी कहा हेलो डॉक्टर फिर ऐसे डॉक्टर दिनेश ने बोला तुम्हारी पढ़ाई हो गई ? वह बोली हां कल प्रैक्टिकल सबमिशन का लास्ट डे है डॉक्टर के नहीं बोला अभी मेरा भी यह लास्ट ईयर है इसके बाद हम सब अलग अलग हो जाएंगे उसने बोला आप लोग क्यों पढ़ाई हो गई अच्छी बात है ना, आप भी सर्जन बन जाओगे .
दिनेश ने हंसकर कहा पर यह भी सच है इस हॉस्पिटल में अब से नहीं रहेंगे. नीता ने पूछा मेरे पापा को बहुत अच्छे से देखा था धन्यवाद इसलिए पता नहीं अचानक पूछा अच्छा मेरे पापा भी ठीक है ना पहले से वह ठीक हो जाएंगे ना कैंसर काफी हद तक कम हो चुका है अब तो कंट्रोल है ना
दिनेश ने कहा हां अच्छे हैं थोड़े दिनों में
दिनेश ने फिर पूछा " क्या मैं तुम्हें एक सवाल पूछ सकता हूं ?
नीता हरभरा कर बोली "हां पूछ लीजिए"
दिनेश ने पूछा "अच्छा नीता मैं कैसा लगता हूं?" नीता तो गुस्से में आ गई " कैसा लगता हूं क्या आप बहुत अच्छे डॉक्टर हो बड़े सर्जन बनोगे आप मेरे पापा को बहुत अच्छे से देखभाल करते हो," दिनेश ने हंसकर कहा वह तो मुझे पता है तुम्हें कैसे लगता हूं ?
नीता को पता था कभी ना कभी यह दिन आएग...कोई जवाब नहीं था या कुछ कहना नहीं चाहती थी नीता ने उससे पूछा अच्छा क्या मैं आप को एक सवाल पूछ सकती हूं बोला हां पूछो" आपको मैं ही क्यों पसंद आई और भी कितने डॉक्टर्स है इन लोग तो बहुत अच्छे हैं डॉक्टर दिनेश ने हंसकर कहा तुम्हारा कॉन्फिडेंस मुझे भाया नॉन मेडिकल होकर तुमने दिन से डॉक्टर नवीन को केस हिस्ट्री बताई और इस तरीके से तुमने सब को संभाला उस टाइम मुझे वह बहुत भाया.
नीता बोली "उसमें क्या बड़ी बात है ?"
दिनेश ने बोला "यही बड़ी बात है"
नीता ने बोला अच्छा बात बोलिए तो मेरे पापा की फाइल किसने ली थी ऐसे सुनने में आया था कि आपने पढ़ने के लिए लिया था डॉ दिनेश सर झुका कर बोले हां थी पढ़ने के लिए नहीं अरे नंबर देखने के लिए मैंने सोचा था या नहीं था मैंने सही जगह रख दिया उसके बाद मुझे कोई अंदाजा नहीं वह कहां गायब हो गया नीता थोड़े गुस्से में आकर बोली यही सुनना था मुझे, आपको पता है आपके लिए मेरी मम्मी और पापा को कितना घूमना पड़ा था कितना जरूरी था. आपको अगर नंबर मांगा था तो मुझसे पूछ लेते मैं दे देती आपको फाइल छुपाने की क्या जरूरत थी? आपके मेडिकल एथिक्स नहीं है यह. दिनेश चुपचाप सुनता गया दिनेश के पास कोई जवाब नहीं था इसका!!! दिनेश आखिर में बोला कल तुम्हारे पापा डिस्चार्ज हो रहे हैं तुम कॉलेज के बाद मेरे से एक बार मिल लेना परसों वैलेंटाइंस डे है मैं तुमसे एक बार मिलना चाहता हूं.
नीता कुछ कह नहीं पाई उसने बोला ठीक है मैं देखती हूं मेरा खाना हो चलिए मैं जाती हूं दिनेश मुस्कुराया नीता ने फ्लैट रखते हुए देखा दिनेश के दोस्त कैंटीन में एक तरफ उसके साथ हंस रहे थे नीता को पता था कि इन लोगों में हंसी मजाक रहता है और दिनेश थोड़ी शांत मिजाज के थे पर उनके दोस्त एक बार उनसे मजाक किया करते थे नीता को लगा कि शायद कोई शर्त लगा था या कुछ उसने उसने सोचा नहीं पूरी रात भर सोचती रही कल वह जाए या ना जाए उसके लिए प्रेम कहानी भी थी कहीं ना कहीं उसे लगा कि यह तो डॉक्टर बन जाएगा पर अगर मैंने अपनी पढ़ाई अच्छे से नहीं की तो मेरे सपने का क्या मेरा कैरियर अपने करियर को बहुत हां मानती थी उसको पता था उसके पापा ज्यादा दिन नहीं है उसे कुछ बनना है उसके पापा का वह सपना पूरा करना है और उसे डर था डॉक्टर दिनेश का यह मजाक है कल वह घर गई तो एक मजाक बन जाएगी कॉलेज में कई बार अपने दोस्तों के साथ ऐसा मजाक होते हुए देखा है शायद उसने अपने दिल को कभी सोचना ही नहीं दिया कभी प्यार में विश्वास नहीं करती थी चलिए प्यार उसके मम्मी पापा उसका और सपना था
अगले दिन जब वह हॉस्पिटल में गई डॉक्टर दिनेश को देखा वह कुछ नहीं बोली पर हां उस दिन वह सज संवर जरूर गई थी आज डॉक्टर दिनेश के साथ थोड़ी अलग थी डॉक्टर एक मुस्कुराहट थी नीता भी मुस्कुराए करीबन एक डेढ़ घंटे में उसके पापा का डिस्चार्ज हो गया उसने टैक्सी बोलाई पापा के साथ घर चली गई.
घर जाने के लिए तैयार हो गए जाते वक्त उसने देखा डॉ दिनेश दूर एक जगह खड़े उसका इंतजार कर रहे थे नीता ने चुपचाप देखा पर कुछ देर नीता की आंखों में थोड़ी आंसू थे पर शायद उसके मन की दृढ़ता कुछ बनना बहुत ज्यादा जरूरी था .
आज की भूल नहीं पाई डॉक्टर दिनेश को उसके बाद भी फोटो मिले थे होने के बाद डॉक्टर नवीन के पास गई हो पापा को लेकर डॉक्टर नवीन ने बोला एक काम करो तुम बाहर आ जाओ तुम्हारे पापा को लेकर उनका एक टेस्ट होना बाकी है नीता ने बोला नहीं आ सकती अजनबी ने बोला क्यों इंटरव्यू हंसकर बोले क्या चीज का इंटरव्यू मुझे कॉलेज में पढ़ाने का मौका मिला है कॉलेज के प्रोफेसर के लिए इंटरव्यू उसने बस देखा डॉक्टर दिनेश कुछ लिखते लिखते रुक गए तूने सुना और हंस कर अपना काम करते गया नीता चुपचाप निकल गई अपने पापा के साथ अगले दिन उसने उसकी मम्मी के साथ वह हॉस्पिटल जा रही थी तब सो रही थी डॉ दिनेश अपने दोस्तों के साथ मजे कर रहे थे नीता ने देख कर भी अनदेखा कर दिया उनको लिफ्ट पर ऊपर चले गए आते वक्त उसे डॉक्टर दिनेश मिले डॉ दिनेश ने कहा ऑल द बेस्ट नीता चुपचाप हंसकर निकल गई नीता और दिनेश की आखिरी मुलाकात थी अकेले दिनेश कोई पहला प्यार भी नहीं था पर कहीं ना कहीं उसके लिए वह एक एहसास था
नवीन के पास नीता का आना जाना चाहता ही था अपना मेंटर मानती थी भारत में कई कहीं डॉक्टर्स के उसे डॉक्टर दिनेश के बारे में पता चलता रहता था. थोड़े दिनों में आपके पापा गुजर गया और नीता की जिंदगी में बहुत बदल गया नीता अभी पुणे में रहती है वही करती काम करती है अपनी मां के साथ उसने अपनी सुंदर दुनिया बसाई है देखते-देखते 5-6 साल ऐसे ही गुजर गए , इस बीच नीता ने डॉ दिनेश को पुणे में शायद से एक दो बार देखा था पर सोचती थी उसकी वह गलतफहमी थी उसे यह बात भी पता थी कि शायद डॉक्टर दिनेश वही के ही रहने वाले थे.
उसने कभी ध्यान नहीं दिया,नीता का अचानक एक दिन स्कूटर एक्सीडेंट हो गया अचानक उसे समझ नहीं आ रहा है कि क्या करें उसके घर के नजदीकी एक हॉस्पिटल में इमरजेंसी वार्ड मैं गई डॉक्टर की लिस्ट को देख कर वह थोड़ा झिझक गई जब उसने डॉक्टर दिनेश का नाम देखा वहां पर उसे लगा नाम के तो तो डॉक्टर हो ही सकते हैं जख्म इतना ज्यादा दर्द दे रहा थ .डॉक्टर दिनेश को देखा मन ही मन उसे लगा शायद डॉक्टर दिनेश उसे भूल ही गए रहेंगे उसने अपना ध्यान नहीं दीया उसने अपना केस बताया तभी डॉक्टर दिनेश ने सारी बातें काट कर पूछा कैसे हैं तुम्हारे पापा. नीता ने कहा वह भी नहीं रहे ,डॉ दिनेश सर झुका कर बोले आई एम सॉरी उन्होंने नीता को एडमिट कर लिया.
उसने यह घटना मम्मी से कहा, उसकी मां यह सुनकर थोड़ी हैरान हुई क्योंकि नीता ने प्रपोजल की बात काफी समय के बाद उसकी मां से बात बताई थी और इस बात पर की मां ने कहा था तुमने तब क्यों नहीं कहा मैं हम डॉक्टर दिनेश से बात करते नीता आज भी बोलती हैं तब मेरे लिए मेरा कैरियर और मेरे पापा के सपने सबसे जरूरी था और वह डॉक्टर का मजाक था उसके सारे दोस्त उसके साथ थे.
आज नीता और डॉक्टर दिनेश की बातें अलग थी पहले जहां हिचकिचाहट थी आज दोस्ती तो नहीं बोल सकते पर दोनों बात करते हैं करीब 1 हफ्ते बाद नीता फिर से जब गई डॉक्टर दिनेश न कहा आप 2 हफ्ते बाद आना मेरे पास मैं कांफ्रेंस के लिए जा रहा हूं अगर कुछ लगा तो आप मेरा नंबर ले सकती हैं और पर कॉन्टेक्ट कर लेना नीता को फोन की बात सुनकर हंसी आई उसने कहा ठीक है फोन नंबर दिनेश चुपचाप रह गया दिनेश ने कहां आपका नंबर दे दो मैं सेव कर लेता हूं मिस कॉल दे देता हूं नीता ने बोला नहीं कोई प्रॉब्लम नहीं मेरे पास आपका नंबर है कांटेक्ट कर लूंगी अगर लगेगा तो दिनेश थोड़ा चुप हो गया जैसे आपकी मर्जी रूम से निकलते वक्त नीता हंसकर बोले मेरा नंबर बदला नहीं अब तक इस बात पर दिनेश हलके से मुस्कुराएं वहां से चली आई
आज नीता बदल चुकी थी उसे बस देखना था कि डॉक्टर दिनेश आज फिर से पसंद करते हैं क्या नहीं और उस रात उसे वह जवाब मिल गया जब फोन की घंटी बजी truecaller में एक नाम आया डॉ दिनेश नीता ने जब वह फोन उठाया वहां से बोला हेलो दिनेश बोल रहा हूं क्या कल हम मिल सकते हैं? नीता का जवाब था आपको WhatsApp करती हो लोकेशन..
यह कैसी कहानी है जो शायद से दर्द के रिश्ते से शुरू होकर प्यार के रिश्ते मैं खत्म होती है.
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