मैं सपना हूं मेरे अलग सपने हैं जो आपसे भी मिलते झूलते हैं. मैंने अपने इस छोटे से जीवन में बहुत कुछ देखा है महसूस किया है समझा है उन छोटे-छोटे हिस्सों को मुझे लगता है कि मैं आपके साथ शेयर कर सकती हूं. अपने छोटी कहानियों से कुछ नए रंग भर सकती हूं क्योंकि इन कहानियों से मैंने भी कुछ सीखा है जाना है
1. छोटी सी मुस्कान
वो इन दोनों की बात है मैं अपने 12वीं परीक्षा के बाद कुछ कारण से मुंबई के एक बड़े हॉस्पिटल में गई थी, हां याद आया मेरे दोस्त माया के पापा का ऑपरेशन था वह अभी आईसीयू में थे मैं अपने दोस्त के साथ बातें कर रही थी कि हमने देख एक छोटी सी लड़की हमें देख रही थी वह उन दिनों की बात है जब मोबाइल फोन साधारण सा हुआ करता था स्मार्टफोंस तो थे ही नहीं बस याद है kal Ho Naa Ho का वह रिंगटोन बहुत देर से मैं और मेरे दोस्त एक दूसरे से बात कर रहे थे मेरी दोस्त बार-बार उस छोटी सी लड़की को देख रही थी मैंने उससे पूछा क्या देख रही हो मेरे दोस्त ने कहां वह रोज सुबह आती है शायद उसका कोई हॉस्पिटल में भर्ती है
हम दोनों ने जरा झिझकते हुए उस लड़की को बुला ही लिया उसके साथ शायद उसके नाना या दादाजी थे वह आई हमारे पास और हमसे कहा दीदी पहले फोन बताओ मेरे पास तो फोन था मैंने उसे दिखाया ज्यादा कुछ तो गेमस नहीं थे तभी हमने छोटी बच्ची से पूछा उसका नाम उसने हंस कर कहा मेरा नाम खुशी है मेरी दोस्तों से पूछा कौन सी क्लास में पढ़ती हो उसने बोला नर्सरी दीदी कह नहीं सकते थे इतनी प्यारी बच्ची आज की कीमत सरलतम मुझे याद है मेरे दोस्त उसको पूछा क्यों आए हो यहां बच्चों की घूमने की जगह नहीं है वह हंस कर बोली घूमने नहीं आई हूं पापा को देखने आए हैं परेशान होकर मैंने भी उससे पूछा क्या हुआ तुम्हारे पापा को? मोबाइल से खेलते खेलते उसने अपनी पुत्री से andaaz में कहा वेंटिलेटर मैं मेरे पापा मैं और मेरी दोस्त चुप रह गए क्योंकि वेंटीलेटर एक ऐसा शब्द है जो अच्छे खासे लोगों को डरा सकता है शायद ही उस बच्चे की मासूमियत ही थी जिसने मुश्किल शब्द को इतनी आसानी से बोल पाया कर दिया हम दोनों को वह देखते रहे और हम से बोली डरो मत कुछ नहीं हुआ है मैंने देखा है एक अजीब सा मास्क डाला है पापा के मुंह पर ठीक हो जाएंगी हम दोनों ने हंसकर कहा हां ठीक हो जाएंगे शायद शायद उसकी वह सरलता ही थी जिसने इतनी बड़ी चीज को ऐसे देखा मेरी दोस्त बहुत ज्यादा डरी हुई थी यह जानते हुए भी उसके पापा ज्यादा बीमार नहीं है बस ऑपरेशन के बाद उन्हें सही करने के लिए थोड़े वक्त के लिए आईसीयू मैं रखा गया था.
उस दिन के बाद हमें खुशी कभी नहीं देखी खुशी ने हमारे अंदर खुश रहना सिखा दिया शायद बच्चों की यही सरलता है जो हमें बड़ों को सीखना चाहिए.
यह एक कहानी हॉस्पिटल की मेरे पास से थोड़े बहुत किस्से हैं जो मैं आप लोगों से प्यार करना चाहती हो.
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